श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.3.13 
नर्मदायै नम: प्रातर्नर्मदायै नमो निशि।
नमोऽस्तु नर्मदे तुभ्यं त्राहि मां विषसर्पत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल नर्मदा को नमस्कार है और रात्रि में भी नर्मदा को नमस्कार है। हे नर्मदे! आपको बार-बार नमस्कार है, विष और सर्पों से मेरी रक्षा कीजिए।॥13॥
 
‘Salutations to Narmada in the morning and salutations to Narmada in the night too. O Narmada! Salutations to you again and again, please protect me from poison and snakes.’॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)