श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.3.11 
सकलपन्नगाधिपतयश्च नर्मदायै वरं ददु:। यस्तेऽनुस्मरणसमवेतं नामग्रहणं करिष्यति न तस्य सर्पविषभयं भविष्यतीति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय सभी नाग राजाओं ने नर्मदा नदी को यह वरदान दिया कि जो कोई तुम्हारा स्मरण करते हुए तुम्हारा नाम जपेगा, उसे सर्पविष का भय नहीं रहेगा ॥11॥
 
At that time all the serpent kings blessed Narmada River with the boon that whoever will chant your name while remembering you will not be afraid of snake venom. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)