श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.3.1 
अतश्च मान्धातु: पुत्रसन्ततिरभिधीयते॥ १॥
 
 
अनुवाद
अब हम मान्धाता के पुत्रों की सन्तान का वर्णन करते हैं ॥1॥
 
Now we describe the progeny of Mandhaata's sons. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)