श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  4.24.151 
एतद्विदित्वा न नरेण कार्यं
ममत्वमात्मन्यपि पण्डितेन।
तिष्ठन्तु तावत्तनयात्मजाद्या:
क्षेत्रादयो ये च शरीरिणोऽन्ये॥ १५१॥
 
 
अनुवाद
ऐसा जानकर पुत्र, पुत्री, क्षेत्र आदि अन्य जीव पृथक् रहें, बुद्धिमान पुरुष को अपने शरीर में भी ममता नहीं करनी चाहिए ॥151॥
 
Knowing this, the son, daughter, area etc. and other living beings should remain separate, an intelligent person should not have affection even for his own body. 151॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इति श्रीपराशरमुनिविरचिते श्रीविष्णुपरत्वनिर्णायके श्रीमति विष्णुमहापुराणे चतुर्थोंऽश: समाप्त:।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)