श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 24: कलियुगी राजाओं और कलिधर्मोंका वर्णन तथा राजवंश-वर्णनका उपसंहार  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  4.24.128 
पृथिव्युवाच
कथमेष नरेन्द्राणां मोहो बुद्धिमतामपि।
येन फेनसधर्माणोऽप्यतिविश्वस्तचेतस:॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी कहती है - हे प्रभु! इन राजाओं में कैसी आसक्ति है कि इतने बुद्धिमान होते हुए भी, बुलबुले के समान क्षणभंगुर होते हुए भी इन्हें अपनी स्थिरता पर इतना विश्वास है॥128॥
 
The Earth says - Oh! What kind of attachment do these kings have that in spite of being so intelligent, they have so much faith in their stability despite being as fleeting as a bubble.॥ 128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)