श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 21: भविष्यमें होनेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.21.3 
जनमेजयस्यापि शतानीको भविष्यति॥ ३॥ योऽसौ याज्ञवल्क्याद्वेदमधीत्य कृपादस्त्राण्यवाप्य विषमविषयविरक्तचित्तवृत्तिश्च शौनकोपदेशादात्मज्ञानप्रवीण: परं निर्वाणमवाप्स्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय का पुत्र शतानीक होगा, जो याज्ञवल्क्य से वेदों का अध्ययन करेगा, कृप से अस्त्र-शस्त्र विद्या प्राप्त करेगा, विषम विषयों से विरक्त हो जाएगा, महर्षि शौनक के उपदेश से आत्मज्ञान में निपुण होगा और परम निर्वाण पद को प्राप्त करेगा ॥3-4॥
 
Janamejaya's son will be Shatanika, who will study the Vedas from Yajnavalkya, acquire the knowledge of weapons from Kripa, become detached from odd subjects, become adept in self-knowledge through the teachings of Maharishi Shaunaka and attain the state of ultimate nirvana. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)