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श्लोक 4.20.52  |
| अभिमन्योरुत्तरायां परिक्षीणेषु कुरुष्वश्वत्थामप्रयुक्तब्रह्मास्त्रेण गर्भ एव भस्मीकृतो भगवतस्सकलसुरासुरवन्दितचरणयुगलस्यात्मेच्छया कारणमानुषरूपधारिणोऽनुभावात्पुनर्जीवितमवाप्य परीक्षिज्जज्ञे॥ ५२॥ योऽयं साम्प्रतमेतद्भूमण्डलमखण्डितायतिधर्मेण पालयतीति॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर जब कुरुकुल दुर्बल हो गया, तब अश्वत्थामा के द्वारा चलाए गए ब्रह्मास्त्र से वह गर्भ में ही भस्म हो गया, किन्तु फिर अपनी इच्छानुसार माया-मानव शरीर धारण करने वाले सकल सुरसुरवन्दितचरणारविन्द श्रीकृष्णचन्द्र के प्रभाव से वह पुनः जीवित हो गया; वह परीक्षित अभिमन्यु के द्वारा उत्तरा के गर्भ से उत्पन्न हुआ, जो इस समय सम्पूर्ण जगत् का ऐसे धर्मपूर्वक शासन कर रहा है कि भविष्य में भी उसका ऐश्वर्य क्षीण नहीं होता ॥52-53॥ |
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| Subsequently, when Kurukula became weak, he was burnt to ashes in the womb itself by the Brahmastra which was attacked by Ashwatthama, but then he came back to life due to the influence of Sakal Surasuravanditcharanaravind Shri Krishnachandra, who has assumed the Maya-human body as per his own wish; That Parikshit was born from the womb of Uttara through Abhimanyu, who is currently ruling the entire world in such a righteous manner that his wealth does not diminish in the future also. 52-53॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे विंशोऽध्याय:॥ २०॥ |
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