श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 20: कुरुके वंशका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.20.44 
यौधेयी युधिष्ठिराद्देवकं पुत्रमवाप॥ ४४॥ हिडिम्बा घटोत्कचं भीमसेनात्पुत्रं लेभे॥ ४५॥ काशी च भीमसेनादेव सर्वगं सुतमवाप॥ ४६॥ सहदेवाच्च विजया सुहोत्रं पुत्रमवाप॥ ४७॥ रेणुमत्यां च नकुलोऽपि निरमित्रमजीजनत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उदाहरण के लिए, युधिष्ठिर से देवक, हिडिम्बा से भीमसेन, हिडिम्बा से घटोत्कच, काशी से सर्वगा, सहदेव से सर्वगा, विजया से सुहोत्र, रेनूमति से नकुल, नकुल से निरमित्र नामक पुत्र पैदा हुआ। 44-48॥
 
For example, from Yudhishthir, Yaudheyi had a son named Devak, from Bhimsen, Hidimba had a son named Ghatotkacha, from Kashi, a son named Sarvaga, from Sahadeva, Vijaya had Suhotra, from Renumati, Nakula gave birth to Nirmitra. 44-48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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