श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 20: कुरुके वंशका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.20.40 
पाण्डोरप्यरण्ये मृगयायामृषिशापोपहतप्रजाजननसामर्थ्यस्य धर्मवायुशक्रैर्युधिष्ठिरभीमसेनार्जुना: कुन्त्यां नकुलसहदेवौ चाश्विभ्यां माद्रॺां पञ्चपुत्रास्समुत्पादिता:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वन में आखेट करते समय ऋषि के शाप से पाण्डु सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ हो गए, अतः उनकी पत्नी कुन्ती से धर्म, वायु और इन्द्र ने क्रमशः युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन नामक तीन पुत्र उत्पन्न किए तथा माद्री से अश्विनीकुमारों ने नकुल और सहदेव नामक दो पुत्र उत्पन्न किए। इस प्रकार उनके पाँच पुत्र हुए ॥40॥
 
While hunting in the forest, Pandu became incapable of producing children due to the curse of the sage, hence Dharma, Vayu and Indra from his wife Kunti gave birth to three sons named Yudhishthir, Bhima and Arjun respectively and from Madri the two Ashwinikumars gave birth to two sons named Nakul and Sahadev. In this way he had five sons. 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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