श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 20: कुरुके वंशका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.20.19 
ततस्ते पुनरप्यूचु:॥ १९॥ यावद्देवापिर्न पतनादिभिर्दोषैरभिभूयते तावदेतत्तस्यार्हं राज्यम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस पर ब्राह्मण ने पुनः कहा - 'जब तक आपके बड़े भाई देवापि किसी प्रकार पतित नहीं होते, तब तक यह राज्य उन्हीं के योग्य है ॥ 19-20॥
 
On this the Brahmin again said, 'As long as your elder brother Devaapi does not fall in any way, this kingdom is only fit for him.॥ 19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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