|
| |
| |
श्लोक 4.20.13  |
यं यं कराभ्यां स्पृशति जीर्णं यौवनमेति स:।
शान्तिं चाप्नोति येनाग्रॺां कर्मणा तेन शान्तनु:॥ १३॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| “जिसको [राजा शान्तनु] अपने हाथ से स्पर्श करते थे, उसके स्पर्श से बूढ़े भी पुनः जवान हो जाते थे और समस्त प्राणी परम शांति प्राप्त कर लेते थे। इसलिए उनका नाम शान्तनु पड़ा।”॥13॥ |
| |
| “Whomever [King Shantanu] touched with his hand, even old men would regain their youth and all beings would attain supreme peace by his touch. Therefore he was called Shantanu.”॥ 13॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|