श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 20: कुरुके वंशका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.20.13 
यं यं कराभ्यां स्पृशति जीर्णं यौवनमेति स:।
शान्तिं चाप्नोति येनाग्रॺां कर्मणा तेन शान्तनु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
“जिसको [राजा शान्तनु] अपने हाथ से स्पर्श करते थे, उसके स्पर्श से बूढ़े भी पुनः जवान हो जाते थे और समस्त प्राणी परम शांति प्राप्त कर लेते थे। इसलिए उनका नाम शान्तनु पड़ा।”॥13॥
 
“Whomever [King Shantanu] touched with his hand, even old men would regain their youth and all beings would attain supreme peace by his touch. Therefore he was called Shantanu.”॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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