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vishnu 4.2.86: तब ऋषि के शाप से भयभीत होकर मान्धाता ने कन्याओं के अन्तःपुर के रक्षक को आदेश दिया।86.   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  4.2.86 
ततश्च मान्धात्रा मुनिशापशङ्कितेन कन्यान्त:पुरवर्षवरस्समाज्ञप्त:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषि के शाप से भयभीत होकर मान्धाता ने कन्याओं के अन्तःपुर के रक्षक को आदेश दिया।86.
 
Then, fearing the sage's curse, Mandhata gave orders to the guardian of the girls' inner palace. 86.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)