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vishnu 4.2.80: श्री पराशर बोले - ऋषि के ऐसे वचन सुनकर राजा ने उनके वृद्ध और जर्जर शरीर को देखकर शाप के भय से मना करने में संकोच किया। उनसे भयभीत होकर उन्होंने कुछ नीचे की ओर देखा और मन ही मन चिंता करने लगे।   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  4.2.80 
श्रीपराशर उवाच
इति ऋषिवचनमाकर्ण्य स राजा जराजर्जरित देहमृषिमालोक्य प्रत्याख्यानकातरस्तस्माच्च शापभीतो बिभ्यत्किञ्चिदधोमुखश्चिरं दध्यौ च॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - ऋषि के ऐसे वचन सुनकर राजा ने उनके वृद्ध और जर्जर शरीर को देखकर शाप के भय से मना करने में संकोच किया। उनसे भयभीत होकर उन्होंने कुछ नीचे की ओर देखा और मन ही मन चिंता करने लगे।
 
Shri Parashara said - On hearing such words from the sage, the king, on seeing his old and worn out body, was hesitant to refuse out of fear of the curse. Being afraid of him, he looked down a little and started worrying in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)