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vishnu 4.2.73: इस प्रकार जल में स्थित सौभरि मुनि अपनी एकाग्रता छोड़कर मत्स्यराज के अपने पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आदि के साथ रमणीय क्रीड़ाओं को देखने में दिन-रात ध्यान करते रहते थे।   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  4.2.73 
अथान्तर्जलावस्थितस्सौभरिरेकाग्रतस्समाधिमपहायानुदिनं तस्य मत्स्यस्यात्मजपुत्रपौत्रदौहित्रादिभिस्सहातिरमणीयतामवेक्ष्याचिन्तयत्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जल में स्थित सौभरि मुनि अपनी एकाग्रता छोड़कर मत्स्यराज के अपने पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आदि के साथ रमणीय क्रीड़ाओं को देखने में दिन-रात ध्यान करते रहते थे।
 
Thus, the sage Saubhari, situated in the water, leaving his state of concentration, contemplated day and night on seeing the delightful sports of the King of the Fishes with his son, grandson and great-grandson etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)