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vishnu 4.2.63: तभी से चक्रवर्ती मांधाता सप्तद्वीप पृथिवी के राज्य का आनंद लेने लगे। 63॥ इस बारे में यह श्लोक कहा गया है। 64॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  4.2.63 
ततस्तु मान्धाता चक्रवर्ती सप्तद्वीपां महीं बुभुजे॥ ६३॥ तत्रायं श्लोक:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
तभी से चक्रवर्ती मांधाता सप्तद्वीप पृथिवी के राज्य का आनंद लेने लगे। 63॥ इस बारे में यह श्लोक कहा गया है। 64॥
 
Since then Chakravarti Mandhata started enjoying the kingdom of Saptadvipa Prithivika. 63॥ This verse is said about this. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)