श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.2.53 
तच्च कलशमपरिमेयमाहात्म्यमन्त्रपूतं पपौ॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
और उन्होंने उस अनंत महिमावाले पात्र से मन्त्रयुक्त जल पी लिया ॥53॥
 
And he drank the mantra-filled water from that vessel of infinite glory. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)