श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.2.41 
तस्य च तनयास्समस्ता एव धुन्धुमुखनि:श्वासाग्निना विप्लुष्टा विनेशु:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
धुंधु के मुख से निकली हुई अग्नि से उसके सभी पुत्र जलकर मर गए ॥41॥
 
All his sons were burnt to death by the breathless fire emanating from the mouth of Dhundhu. 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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