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vishnu 4.2.28: "हे क्षत्रियश्रेष्ठ! हम चाहते हैं कि आप हमारे शत्रुओं के संहार में हमारी सहायता करें। कृपया हम अतिथियों का अपमान न करें।" यह सुनकर पुरंजय ने कहा-॥28॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.2.28 
भो भो क्षत्रियवर्यास्माभिरभ्यर्थितेन भवतास्माकमरातिवधोद्यतानां कर्तव्यं साहाय्यमिच्छामस्तद्भवतास्माकमभ्यागतानां प्रणयभङ्गो न कार्य इत्युक्त: पुरञ्जय: प्राह॥ २८॥
 
 
अनुवाद
"हे क्षत्रियश्रेष्ठ! हम चाहते हैं कि आप हमारे शत्रुओं के संहार में हमारी सहायता करें। कृपया हम अतिथियों का अपमान न करें।" यह सुनकर पुरंजय ने कहा-॥28॥
 
"O best of the Kshatriyas! We want you to help us in killing our enemies. Please do not insult us, the guests." Hearing this, Puranjay said -॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)