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vishnu 4.2.17: जब इक्ष्वाकु के कुल पुरोहित वसिष्ठ से मांस अर्पण करने के लिए कहा गया, तब उन्होंने कहा, "इस अपवित्र मांस की क्या आवश्यकता है? आपके दुष्ट पुत्र ने इसे अपवित्र कर दिया है, क्योंकि उसने इसमें से खरगोश खा लिया है।"॥17॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.2.17 
इक्ष्वाकुकुलाचार्यो वसिष्ठस्तत्प्रोक्षणाय चोदित: प्राह। अलमनेनामेध्येनामिषेण दुरात्मना तव पुत्रेणैतन्मांसमुपहतं यतोऽनेन शशो भक्षित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब इक्ष्वाकु के कुल पुरोहित वसिष्ठ से मांस अर्पण करने के लिए कहा गया, तब उन्होंने कहा, "इस अपवित्र मांस की क्या आवश्यकता है? आपके दुष्ट पुत्र ने इसे अपवित्र कर दिया है, क्योंकि उसने इसमें से खरगोश खा लिया है।"॥17॥
 
When requested to offer the meat, Vasishtha, the family priest of Ikshvaku, said, "What is the need of this impure meat? Your evil-spirited son has polluted it because he has eaten a rabbit from it."॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)