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vishnu 4.2.16: 'बहुत अच्छा' कहकर उसने उनकी आज्ञा स्वीकार की और धनुष-बाण लेकर वन में आया और बहुत से हिरणों का वध किया। किन्तु बहुत थका हुआ और भूखा होने के कारण विकुक्षि ने एक खरगोश को खा लिया और बचा हुआ मांस लाकर अपने पिता को दे दिया।   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.2.16 
स तथेति गृहीताज्ञो विधृतशरासनो वनमभ्येत्यानेकशो मृगान् हत्वा श्रान्तोऽतिक्षुत्परीतो विकुक्षिरेकं शशमभक्षयत्। शेषं च मांसमानीय पित्रे निवेदयामास॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'बहुत अच्छा' कहकर उसने उनकी आज्ञा स्वीकार की और धनुष-बाण लेकर वन में आया और बहुत से हिरणों का वध किया। किन्तु बहुत थका हुआ और भूखा होने के कारण विकुक्षि ने एक खरगोश को खा लिया और बचा हुआ मांस लाकर अपने पिता को दे दिया।
 
Saying 'very good' he accepted their command and came to the forest with bow and arrow and killed many deer. But being very tired and hungry, Vikukṣī ate one of the rabbits and brought the remaining meat and offered it to his father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)