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vishnu 4.2.131: फिर भगवान् में अनुरक्त होकर, सम्पूर्ण जीवन के कर्मों का त्याग करके, मनुष्य भगवान् के प्रति समर्पित मनुष्यों के अच्युत पद (मोक्ष) को प्राप्त हुआ, जो अजन्मा, नित्य, अविनाशी, विकारों और मर्त्यता से रहित, इन्द्रियों से परे और सनातन है ॥131॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  4.2.131 
भगवत्यासज्याखिलं कर्मकलापं हित्वानन्तमजमनादिनिधनमविकारमरणादिधर्ममवाप परमनन्तं परवतामच्युतं पदम्॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
फिर भगवान् में अनुरक्त होकर, सम्पूर्ण जीवन के कर्मों का त्याग करके, मनुष्य भगवान् के प्रति समर्पित मनुष्यों के अच्युत पद (मोक्ष) को प्राप्त हुआ, जो अजन्मा, नित्य, अविनाशी, विकारों और मर्त्यता से रहित, इन्द्रियों से परे और सनातन है ॥131॥
 
Then, having become attached to God, renouncing all the activities of life, one attained the infallible state (salvation) of the people devoted to God, which is unborn, eternal, imperishable, free from vices and mortalities, beyond the senses and eternal. 131॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)