Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 4.2.127: उन सर्वतेजस्वी, सर्वरूप, अव्यक्त, व्यक्त शरीर, अनंत भगवान श्रीविष्णु में मेरा निर्दोष मन सदैव शांत रहे, जिससे मुझे फिर जन्म न लेना पड़े॥127॥ | vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र । vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन सर्वतेजस्वी, सर्वरूप, अव्यक्त, व्यक्त शरीर, अनंत भगवान श्रीविष्णु में मेरा निर्दोष मन सदैव शांत रहे, जिससे मुझे फिर जन्म न लेना पड़े॥127॥
May my blameless mind always remain calm in that all-glorious, all-form, unmanifested, manifest body, infinite Lord Shri Vishnu, so that I do not have to take birth again. 127॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥