अहं चरिष्यामि तदात्मनोऽर्थे
परिग्रहग्राहगृहीतबुद्धि:।
यदा हि भूय: परिहीनदोषो
जनस्य दु:खैर्भविता न दु:खी॥ १२५॥
अनुवाद
मेरी बुद्धि को मदरूपी मगरमच्छ ने पकड़ लिया है। इस समय मैं ऐसा उपाय करूँगा कि विकारों से मुक्त होकर अपने कुटुम्बियों के दुःखों से दुःखी न होऊँगा ॥125॥
The crocodile of possessions has captured my intellect. At this time I will take such measures that after becoming free from vices I will not be saddened by the sufferings of my family members. ॥125॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥