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vishnu 4.2.116: ये इच्छाएँ हजारों या लाखों वर्षों में भी समाप्त नहीं हो सकतीं। यदि उनमें से कुछ पूरी भी हो जाएँ, तो उनके स्थान पर नई इच्छाएँ उत्पन्न हो जाती हैं ॥116॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  4.2.116 
मनोरथानां न समाप्तिरस्ति
वर्षायुतेनापि तथाब्दलक्षै:।
पूर्णेषु पूर्णेषु मनोरथाना-
मुत्पत्तयस्सन्ति पुनर्नवानाम्॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
ये इच्छाएँ हजारों या लाखों वर्षों में भी समाप्त नहीं हो सकतीं। यदि उनमें से कुछ पूरी भी हो जाएँ, तो उनके स्थान पर नई इच्छाएँ उत्पन्न हो जाती हैं ॥116॥
 
These desires cannot end even in thousands or millions of years. Even if some of them are fulfilled, new desires arise in their place. ॥ 116॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)