Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 4.2.114: वह सोचने लगा - ‘क्या मेरे ये पुत्र मधुर वाणी बोलेंगे? क्या ये अपने पैरों पर चलेंगे? क्या ये यौवन प्राप्त करेंगे? क्या मैं उस समय इन्हें इनकी पत्नियों के साथ देख सकूँगा? क्या तब इनके पुत्र होंगे और क्या मैं इन्हें अपने पुत्रों और पौत्रों के साथ देख सकूँगा?’ इस प्रकार समय बीतने पर दिन-प्रतिदिन इन इच्छाओं की उपेक्षा करते हुए वह सोचने लगा -॥114॥ | vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र । vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह सोचने लगा - ‘क्या मेरे ये पुत्र मधुर वाणी बोलेंगे? क्या ये अपने पैरों पर चलेंगे? क्या ये यौवन प्राप्त करेंगे? क्या मैं उस समय इन्हें इनकी पत्नियों के साथ देख सकूँगा? क्या तब इनके पुत्र होंगे और क्या मैं इन्हें अपने पुत्रों और पौत्रों के साथ देख सकूँगा?’ इस प्रकार समय बीतने पर दिन-प्रतिदिन इन इच्छाओं की उपेक्षा करते हुए वह सोचने लगा -॥114॥
He began to think, 'Will these sons of mine speak sweetly? Will they walk on their own feet? Will they attain youth? Will I be able to see them with their wives at that time? Will they then have sons and will I see them with my sons and grandsons?' Thus, as time passed, neglecting these desires day by day, he began to think -॥ 114॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥