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vishnu 4.2.113: इस प्रकार जैसे-जैसे स्नेह दिन-प्रतिदिन फैलता गया, वैसे-वैसे उसका हृदय अत्यंत स्नेह से भर गया ॥113॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  4.2.113 
अनुदिनानुरूढस्नेहप्रसरश्च स तत्रातीव ममताकृष्टहृदयोऽभवत्॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जैसे-जैसे स्नेह दिन-प्रतिदिन फैलता गया, वैसे-वैसे उसका हृदय अत्यंत स्नेह से भर गया ॥113॥
 
In this way, as the affection spread day by day, his heart became filled with extreme affection. ॥ 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)