Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 4.2.111: "प्रभो! मैंने आपकी योगसिद्धि का यह महान प्रभाव देखा है। मैंने किसी अन्य को इतने वैभव के साथ ऐसे भोग-विलास में लिप्त होते नहीं देखा; यह सब आपकी तपस्या का ही फल है।" इस प्रकार उनका अभिवादन करके वह कुछ समय तक मुनि की इच्छानुसार भोग-विलास करता रहा और अन्त में अपने नगर को लौट गया।।111।। | vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र । vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"प्रभो! मैंने आपकी योगसिद्धि का यह महान प्रभाव देखा है। मैंने किसी अन्य को इतने वैभव के साथ ऐसे भोग-विलास में लिप्त होते नहीं देखा; यह सब आपकी तपस्या का ही फल है।" इस प्रकार उनका अभिवादन करके वह कुछ समय तक मुनि की इच्छानुसार भोग-विलास करता रहा और अन्त में अपने नगर को लौट गया।।111।।
"Lord! I have seen this great effect of your Yog Siddhika. I have not seen anyone else indulging in such luxuries with such great splendor; all this is the result of your penance." Greeting him in this manner, he continued to enjoy the pleasures of the sage's choice for some time and finally returned to his city. 111.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥