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vishnu 4.2.103: "पुत्री! तुम सब यहाँ सुखी तो हो? तुम्हें किसी प्रकार का दुःख तो नहीं है? महर्षि सौभरि तुमसे प्रेम करते हैं या नहीं? क्या तुम्हें हमारा घर भी याद है?" पिता के ऐसा कहने पर राजकुमारी बोली-॥103॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  4.2.103 
अप्यत्र वत्से भवत्या: सुखमुत किञ्चिदसुखमपि ते महर्षिस्स्नेहवानुत न, स्मर्यतेऽस्मद‍्गृहवास इत्युक्ता तं तनया पितरमाह॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
"पुत्री! तुम सब यहाँ सुखी तो हो? तुम्हें किसी प्रकार का दुःख तो नहीं है? महर्षि सौभरि तुमसे प्रेम करते हैं या नहीं? क्या तुम्हें हमारा घर भी याद है?" पिता के ऐसा कहने पर राजकुमारी बोली-॥103॥
 
"Daughter! Are you all happy here? Are you not suffering from any kind of pain? Does Maharishi Saubhari love you or not? Do you remember our home as well?" When her father said this, the princess said -॥103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)