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vishnu 4.2.100: फिर उन सब महलोंमें वे राजकुमारियाँ नाना प्रकारके अन्न, भोजन और लेह्य आदिसे अतिथियों और अपने अनुचर सेवकोंको तृप्त करने लगीं ॥100॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  4.2.100 
ततोऽनवरतेन भक्ष्यभोज्यलेह्याद्युपभोगैरागतानुगतभृत्यादीनहर्निशमशेषगृहेषु ता: क्षितीशदुहितरो भोजयामासु:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
फिर उन सब महलोंमें वे राजकुमारियाँ नाना प्रकारके अन्न, भोजन और लेह्य आदिसे अतिथियों और अपने अनुचर सेवकोंको तृप्त करने लगीं ॥100॥
 
Then, in all those palaces, those princesses started satisfying the guests and their following servants with various types of food, food and lehya etc. 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)