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vishnu 4.2.10: रथीतर के विषय में यह श्लोक प्रसिद्ध है - 'रथितर के वंशज क्षत्रिय होते हुए भी अंगिरस कहलाए; अतः वे क्षत्रुपे ब्राह्मण हुए।'॥10॥   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.2.10 
अत्रायं श्लोक:—
एते क्षत्रप्रसूता वै पुनश्चाङ्गिरसा: स्मृता:।
रथीतराणां प्रवरा: क्षत्रोपेता द्विजातय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
रथीतर के विषय में यह श्लोक प्रसिद्ध है - 'रथितर के वंशज क्षत्रिय होते हुए भी अंगिरस कहलाए; अतः वे क्षत्रुपे ब्राह्मण हुए।'॥10॥
 
This verse is famous regarding Rathitar - 'Descendants of Rathitar, despite being Kshatriyas, were called Angiras; hence they became Kshatraupe Brahmins.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)