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vishnu 4.2.1: श्री पराशर बोले - जिस समय रैवत ककुद्मी ब्रह्मलोक से लौटा ही नहीं था, उसी समय पुण्यजन नामक दैत्यों ने उसकी सम्पूर्ण कुशस्थली को नष्ट कर दिया।   |   vishnu अध्याय 4.2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 2: इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन तथा सौभरिचरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.2.1 
श्रीपराशर उवाच
यावच्च ब्रह्मलोकात्स ककुद्मी रैवतोनाभ्येति तावत्पुण्यजनसंज्ञाराक्षसास्तामस्य पुरीं कुशस्थलीं निजघ्नु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - जिस समय रैवत ककुद्मी ब्रह्मलोक से लौटा ही नहीं था, उसी समय पुण्यजन नामक दैत्यों ने उसकी सम्पूर्ण कुशस्थली को नष्ट कर दिया।
 
Sri Parashara said - At the time when Raivat Kakudmi had not returned from Brahmaloka, the demons named Punyajan destroyed his entire Kushasthali. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)