श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 18: अनुवंश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.18.1 
श्रीपराशर उवाच
ययातेश्चतुर्थपुत्रस्यानोस्सभानलचक्षु:परमेषुसंज्ञास्त्रय: पुत्रा: बभूवु:॥ १॥ सभानलपुत्र: कालानल:॥ २॥ कालानलात्सृञ्जय:॥ ३॥ सृञ्जयात् पुरञ्जय:॥ ४॥ पुरञ्जयाज्जनमेजय:॥ ५॥ तस्मान्महाशाल:॥ ६॥ तस्माच्च महामना:॥ ७॥ तस्मादुशीनरतितिक्षू द्वौ पुत्रावुत्पन्नौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशरजी ने कहा- ययाति के चौथे पुत्र अनुके के सभानल, चक्षु और परमेषु नामक तीन पुत्र हुए। सभानल का पुत्र कालानल और कालानल का पुत्र सृंजय, सृंजय का पुरंजय, पुरंजय का जन्मेजय, जन्मेजय का महाशाल, महाशाल का महामना और महामना के उशीनर और तितिक्षु नामक दो पुत्र हुए। 1-8॥
 
Shri Parasharji said - Yayati's fourth son Anuke had three sons named Sabhanal, Chakshu and Parmeshu. Sabhanal's son was Kalanal and Kalanal's son was Srinjaya, Srinjay's Puranjay, Puranjaya's Janmejay, Janmejay's Mahashal, Mahashal's Mahamana and Mahamana's two sons named Ushinar and Titikshu. 1-8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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