| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 17: द्रुह्युवंश » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 4.17.1  | श्रीपराशर उवाच
द्रुह्योस्तु तनयो बभ्रु:॥ १॥ बभ्रोस्सेतु:॥ २॥ सेतुपुत्र आरब्धनामा॥ ३॥ आरब्धस्यात्मजो गान्धारो गान्धारस्य धर्मो धर्माद् घृत: घृताद् दुर्दमस्तत: प्रचेता:॥ ४॥ प्रचेतस: पुत्रश्शतधर्मो बहुलानां म्लेच्छानामुदीच्यानामाधिपत्यमकरोत्॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री पाराशरजी ने कहा- द्रुह्यु का पुत्र बभ्रु, बभ्रु का सेतु, सेतु का आरब्ध, आरब्ध का गांधार, गांधार का धर्म, धर्म का घृत, घृत का दुर्दम, दुर्दम का प्रचेता और प्रचेता का पुत्र शतधर्म था। उसने बाद के कई म्लेच्छों पर विजय प्राप्त की। 1-5॥ | | | | Shri Parasharji said - Druhyu's son was Babhru, Babhru's Setu, Setu's Aarabdha, Aarabdha's Gandhar, Gandhar's Dharma, Dharma's Ghrit, Ghrit's Durdam, Durdam's Pracheta and Pracheta's son was Shatdharma. He conquered many subsequent Mlechchhas. 1-5॥ | | | | इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे सप्तदशोध्याय:॥ १७॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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