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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 16: तुर्वसुके वंशका वर्णन
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अध्याय 16: तुर्वसुके वंशका वर्णन
श्लोक 1
: श्री पराशर बोले, 'इस प्रकार मैंने तुम्हें यदुवंश का संक्षिप्त वर्णन किया है।
श्लोक 2
: अब तुर्वसुके वंशका वर्णन सुनो ॥2॥
श्लोक 3
: तुर्वसु का पुत्र वह्नि, वह्निक भर्ग, भार्गक का भानु, भानुक का त्रयीसनु, त्रयिसनु का पुत्र करंदम और करंदम का पुत्र मरुत्त था। 3॥
श्लोक 4
: मरुत निःसंतान था। 4.
श्लोक 5
: इसीलिए उन्होंने पुरुवंश के दुष्यंत को अपना पुत्र स्वीकार किया ॥5॥
श्लोक 6
: इस प्रकार ययाति के शाप के कारण तुर्वसु के वंशजों ने पुरु वंश में शरण ली।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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