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vishnu 4.15.50: इस प्रकार जो मनुष्य वृष्णि वंश की उत्पत्ति का यह वर्णन सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त होता है ॥50॥   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  4.15.50 
इति प्रसूतिं वृष्णीनां य: शृणोति नर: सदा।
स सर्वै: पातकैर्मुक्तो विष्णुलोकं प्रपद्यते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जो मनुष्य वृष्णि वंश की उत्पत्ति का यह वर्णन सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त होता है ॥50॥
 
Thus, a person who listens to this description of the origin of the Vrishni clan becomes free from all sins and attains Vishnuloka. ॥ 50॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे पञ्चदशोध्याय:॥ १५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)