श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.15.43 
एवमनेकशतसहस्रपुरुषसंख्यस्य यदुकुलस्य पुत्रसंख्या वर्षशतैरपि वक्तुं न शक्यते॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यदुवंशियों की संख्या लाखों में है, जिनकी गणना सौ वर्षों में भी नहीं की जा सकती ॥43॥
 
In this way the descendants of the Yadu clan, numbering hundreds of thousands of men, cannot be counted even in a hundred years. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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