श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.15.42 
वज्रस्य प्रतिबाहुस्तस्यापि सुचारु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वज्र के पुत्र का नाम प्रतिभाहु था और प्रतिभाहु बहुत ही गुणवान थे। 42.
 
Vajra's son was Pratibahu and Pratibahu was well behaved. 42.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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