| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 4.15.4  | श्रीपराशर उवाच
दैत्येश्वरस्य वधायाखिललोकोत्पत्तिस्थितिविनाशकारिणा पूर्वं तनुग्रहणं कुर्वता नृसिंहरूपमाविष्कृतम्॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री पराशरजी बोले - अपने पहले जन्म में दैत्यराज हिरण्यकशिपु को मारने के लिए सम्पूर्ण लोकों की उत्पत्ति, स्थिति और संहार करने वाले भगवान् शरीर धारण करते हुए सिंह रूप में प्रकट हुए॥4॥ | | | | Shri Parasharji said - In his first birth, to kill the demon king Hiranyakashipu, the Lord who created, created and destroyed all the worlds, while assuming the body, appeared in the form of a lion. 4॥ | | ✨ ai-generated | | |
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