श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.15.32 
सुप्रसन्नादित्यचन्द्रादिग्रहमव्यालादिभयं स्वस्थमानसमखिलमेवैतज्जगदपास्ताधर्ममभवत्तस्मिंश्च पुण्डरीकनयने जायमाने॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उन कमलनेत्र भगवान् के प्रकट होने पर सारा जगत् सुखी हो गया, सूर्य, चन्द्रमा आदि लोकों से युक्त हो गया, सर्पों के भय से रहित हो गया, अधर्म से रहित हो गया और स्वस्थ बुद्धि वाला हो गया ॥32॥
 
Upon the appearance of that lotus-eyed Lord, the whole world became happy, filled with planets like Sun, Moon etc., freed from the fear of snakes, free from unrighteousness and healthy minded. 32॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd