श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.15.28 
अनन्तरं च सप्तमं गर्भमर्द्धरात्रे भगवत्प्रहिता योगनिद्रा रोहिण्या जठरमाकृष्य नीतवती॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर भगवान् की प्रेरणा से योगमाया ने आधी रात को देवकी के सातवें गर्भ को निकालकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया॥28॥
 
Later, with the inspiration of God, Yogamaya pulled out the seventh womb of Devaki at midnight and placed it in the womb of Rohini. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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