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श्लोक 4.15.28  |
| अनन्तरं च सप्तमं गर्भमर्द्धरात्रे भगवत्प्रहिता योगनिद्रा रोहिण्या जठरमाकृष्य नीतवती॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर भगवान् की प्रेरणा से योगमाया ने आधी रात को देवकी के सातवें गर्भ को निकालकर रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया॥28॥ |
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| Later, with the inspiration of God, Yogamaya pulled out the seventh womb of Devaki at midnight and placed it in the womb of Rohini. 28॥ |
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