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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन
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श्लोक 11
श्लोक
4.15.11
तत्र त्वखिलानामेव स भगवन्नाम्नां त्वङ्कारकारणमभवत्॥ ११॥
अनुवाद
उस जन्म में उसे भगवान् के प्रत्येक नाम में तुच्छता अनुभव होने लगी ॥11॥
In that birth he started feeling insignificance in every name of God. 11॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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