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vishnu 4.15.1-2: श्री मैत्रेयजी बोले - प्रभु ! पूर्वजन्मों में हिरण्यकशिपु और रावण होने के कारण इस बालक ने भगवान विष्णु द्वारा मारे जाने पर देवताओं के दुर्लभ भोगों को प्राप्त किया, परन्तु वह उनमें लीन नहीं हुआ; फिर इस जन्म में ही उनके द्वारा मारा जाने पर यह सनातन पुरुष श्री हरि में मोक्ष कैसे प्राप्त हुआ ? 1-2॥   |   vishnu अध्याय 4.15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 15: शिशुपालके पूर्व-जन्मान्तरोंका तथा वसुदेवजीकी सन्ततिका वर्णन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  4.15.1-2 
श्रीमैत्रेय उवाच
हिरण्यकशिपुत्वे च रावणत्वे च विष्णुना।
अवाप निहतो भोगानप्राप्यानमरैरपि॥ १॥
न लयं तत्र तेनैव निहत: स कथं पुन:।
सम्प्राप्त: शिशुपालत्वे सायुज्यं शाश्वते हरौ॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - प्रभु ! पूर्वजन्मों में हिरण्यकशिपु और रावण होने के कारण इस बालक ने भगवान विष्णु द्वारा मारे जाने पर देवताओं के दुर्लभ भोगों को प्राप्त किया, परन्तु वह उनमें लीन नहीं हुआ; फिर इस जन्म में ही उनके द्वारा मारा जाने पर यह सनातन पुरुष श्री हरि में मोक्ष कैसे प्राप्त हुआ ? 1-2॥
 
Shri Maitreyaji said – Lord! Being Hiranyakashipu and Ravana in his previous births, this child-bearer attained the rare pleasures of gods after being killed by Lord Vishnu, but he did not get absorbed in them; Then, after being killed by them in this birth itself, how did he attain salvation in the eternal man Shri Hari? 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)