श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 14: अनमित्र और अन्धकके वंशका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.14.52 
भगवता च स निधनमुपनीतस्तत्रैव परमात्मभूते मनस एकाग्रतया सायुज्यमवाप॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
अन्त में भगवान् के द्वारा मारे जाने पर भी, परमात्म-परमात्मा में मन लगे रहने के कारण उसने सायुज्य-मोक्ष प्राप्त किया ॥52॥
 
In the end, even after being killed by the Lord himself, due to his mind being focused on the Supreme Being, he attained Sayujya-Moksha. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)