स वा पूर्वमप्युदारविक्रमो दैत्यानामादिपुरुषो हिरण्यकशिपुरभवत्॥ ४६॥ यश्च भगवता सकललोकगुरुणा नरसिंहेन घातित:॥ ४७॥
अनुवाद
पूर्वजन्म में यह परम बलशाली पुरुष हिरण्यकशिपु नामक दैत्यों का मूल था, जिसका वध समस्त लोकों के गुरु भगवान नरसिंह ने किया था ॥46-47॥
In his previous life, this extremely powerful person was the origin of the demons named Hiranyakshipu who was killed by Lord Narasimha, the guru of all the worlds. ॥46-47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥