श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 14: अनमित्र और अन्धकके वंशका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.14.22 
भजमानाच्च विदूरथ: पुत्रोऽभवत्॥ २२॥ विदूरथाच्छूर: शूराच्छमी शमिन: प्रतिक्षत्र: तस्मात्स्वयंभोजस्ततश्च हृदिक:॥ २३॥ तस्यापि कृतवर्मशतधनुर्देवार्हदेवगर्भाद्या: पुत्रा बभूवु:॥ २४॥ देवगर्भस्यापि शूर:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भजमान के पुत्र विदुरथ हुए; विदुरथ से शूर, शूर से शमी, शमी से प्रतिक्षत्र, प्रतिक्षत्र से स्वयंभोज, स्वयंभोज से हृदिक और हृदिक से कृतवर्मा, शतधन्वा, देवर्ह और देवगर्भ आदि पुत्र हुए। देवगर्भ का पुत्र शूरसेन था। 22-25॥
 
Bhajman's son became Viduratha; Viduratha had Shura, Shura had Shami, Shami had Pratikshatra, Pratikshatra had Swayambhoj, Swayambhoj had Hridik and Hridik had sons like Kritavarma, Shatadhanva, Devarha and Devgarbha etc. Devgarbha's son was Shurasen. 22-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)