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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा
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श्लोक 89
श्लोक
4.13.89
यद्यन्त्यायामप्यवस्थायां न कस्मैचिद्भवान् कथयिष्यति तदहमेतं ग्रहीष्यामीति॥ ८९॥
अनुवाद
"मैं इसे तभी स्वीकार कर सकता हूँ जब तुम यह बात किसी को न बताओ, भले ही अंत निकट हो।" 89
"I can take it only if you do not tell this to anyone even when the end is near." 89
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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