श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  4.13.130 
तत्र चागतमात्र एव तस्य स्यमन्तकमणे: प्रभावादनावृष्टिमारिकादुर्भिक्षव्यालाद्युपद्रवोपशमा बभूवु:॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचते ही स्यमन्तक मणि के प्रभाव से अनावृष्टि, महामारी, दुर्भिक्ष और सर्पभय आदि समस्त क्लेश शांत हो गए ॥130॥
 
As soon as he reached there, due to the influence of Syamantaka Mani, all the troubles like drought, epidemic, famine and fear of snakes etc. subsided. 130॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)