श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 13: सत्वतकी सन्ततिका वर्णन और स्यमन्तकमणिकी कथा  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  4.13.121 
पुत्रि कस्मान्न जायसे निष्क्रम्यतामास्यं ते द्रष्टुमिच्छामि एतां च मातरं किमिति चिरं क्लेशयसीत्युक्ता गर्भस्थैव व्याजहार॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
"बेटी! तुम पैदा क्यों नहीं हुई? बाहर आओ, मैं तुम्हारा मुख देखना चाहती हूँ। 121. तुम अपनी माता को इतने दिनों से क्यों कष्ट दे रही हो?" राजा के ऐसा कहने पर वह गर्भ में ही बोली -
 
"Daughter! Why are you not born? Come out, I want to see your face. 121. Why are you troubling your mother for so long?" When the king said this, she said while still in the womb -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)