श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.12.45 
इत्येतां ज्यामघस्य सन्ततिं सम्यक् श्रद्धासमन्वित: श्रुत्वा पुमान् मैत्रेय स्वपापै: प्रमुच्यते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! भक्तिपूर्वक ज्यामघ का उपदेश सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥ 45॥
 
O Maitreya, by listening to the sermons of Jyaamgh with devotion, a man becomes free from all his sins. ॥ 45॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)