श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.12.30 
श्रीपराशर उवाच
इत्यात्मेर्ष्याकोपकलुषितवचनमुषितविवेको भयादुरुक्तपरिहारार्थमिदमवनीपतिराह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - इस प्रकार शैव्य द्वारा भय से तथा ईर्ष्या एवं क्रोध से दूषित वचनों के कारण अविवेकपूर्वक कही गई अप्रासंगिक बात के विषय में संशय दूर करने के लिए राजा ने कहा -॥30॥
 
Sri Parashara said - In this manner, in order to dispel the doubts regarding the irrelevant matter spoken by Shaivya out of fear and being irrational due to his jealousy and anger-tainted words, the king said -॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)